किसी एक्टर के लिए इमोशनल सीन को अप्रोच करने के दो तरीके हैं. एक है कि आप खुद रो दें और दूसरा है कि दर्शक को रुला दें ज़्यादातर एक्टर्स की कोशिश होती है कि वो खुद रो दें. पर ये अच्छी एक्टिंग नहीं है. जब एक्टर खुद नहीं रोता, उसके अंदर का निराकार भाव सामने वाले में साकार होता, और आपकी ब्रीदिंग पैटर्न सामने वाले की ब्रीदिंग पैटर्न से मिल जाती है, तो दर्शक के अंदर वही भाव आएगा, जो एक्टर के अंदर आएगा. यही फिल्म को लेकर भी कहा जा सकता है. कुछ फिल्में इतनी सरलता से किसी जटिलता को पेश करती हैं कि आप उनसे जुड़ जाते हैं. कुछ आपका जीवन बदलती हैं. कुछ आपके मन को बदलती हैं और कुछ तो झकझोरकर रख देती हैं. ऐसी ही एक फिल्म है The Boy in the Striped Pyjamas. इस फिल्म का अंत इतना दुखद है कि रोंगटे खड़े हो जाएं. आदमी एक जगह जड़ हो जाए. इस फिल्म में जीवन की विडंबनाएं और दुख की सुंदरता है.
यहूदियों का नरसंहार
ये फिल्म ‘द बॉय इन द स्ट्राइप्ड पजामाज’ नाम के नॉवल पर ही बेस्ड है. 2008 में आई ये फिल्म होलोकास्ट हिस्टोरिकल ड्रामा है. इसके डायरेक्टर हैं मार्क हर्मन. फिल्म नाजी जर्मनी के बैकड्रॉप पर है. ये सेकंड वर्ल्ड वॉर के वक्त की दास्तान है, जहां हिटलर की आर्मी ने पोलैंड पर कब्जा कर लिया था. यहूदियों का नरसंहार किया जा रहा था. उनको गैस चेंबर में ठूंसकर मार दिया जाता था. ऐसे में हिटलर की सेना का एक ऑफिसर प्रमोट होकर बर्लिन से पोलैंड शिफ्ट होता है. उसके साथ उसका परिवार भी शिफ्ट होता है – बेटी, पत्नी और बेटा ब्रूनो.
कहानी ब्रूनो की मासूमियत की!
ये फिल्म ब्रूनो की मासूमियत की कहानी है. वो अपने दोस्त बर्लिन में छोड़कर आया है. उसके पास कोई खेलने के लिए नहीं है. वहां जितने भी लोग हैं, वो सब खडूस हैं. उसे एक दोस्त की तलाश है. यहूदियों से दोस्ती वो कर नहीं सकता. और जितने जर्मन हैं, वो सब सेना में काम करने वाले लोग हैं. उसके घर में एक यहूदी है. वो खाना बनाता है. वो किसी जमाने में डॉक्टर रहा था. पर अब डॉक्टर से पहले यहूदी है. उसकी बेहाली देखकर वो अपनी मां से उसके बारे में पूछता भी है. तो उसे बताया जाता है, वो अलग है. यहूदी इंसान नहीं होते, राक्षस होते हैं.
इंसान है या राक्षस!
आगे चलकर यही राक्षस उस बच्चे के लिए झूला बनाता है, चोट लगने पर उसकी मरहम पट्टी करता है, लेकिन इंसान ऐसा कहां करते हैं! ब्रूनो से जब पूछा जाता है कि उसे क्या बनना है, तो वो कहता है कि वो एक एक्सप्लोरर बनना चाहता है. उसे पढ़ाने वाले टीचर उससे कहते हैं कि दुनिया में कोई भी यहूदी अच्छा नहीं होता, अगर ब्रूनो किसी अच्छे यहूदी को खोज ले, तो वो इस दुनिया का सबसे महान एक्सप्लोरर कहलाएगा.
ब्रूनो : एक महान एक्सप्लोरर
खैर इस फिल्म की असली कहानी तब शुरू होती है, जब ब्रूनो को अपने घर के पीछे यहूदियों का एक कैंप मिलता है. मिलता कैसे है, ये पूछने की गलती न करें. आखिर ब्रूनो एक एक्सप्लोरर है. यहूदियों को इन कैंम्प्स में बहुत बुरी स्थिति में रखा जाता है. वो जेल वाले कपड़े पहनते हैं. फिजीक ऐसा, जैसे कई सालों के भूखे हों. उनके सिर के बाल छील दिए जाते हैं. यहीं ब्रूनो की एक बच्चे से मुलाकात होती है. उसका नाम होता है स्मुएल, और वो एक अच्छा यहूदी होता है. यानी ब्रूनो ने एक अच्छा यहूदी खोज लिया, अब वो दुनिया ग्रेटेस्ट एक्सप्लोरर है.
तारों के उस पार दूसरी दुनिया है
खैर, ब्रूनो कैंप के अंदर घुस नहीं सकता. उसके और उस यहूदी बच्चे के बीच कटीले तार हैं. जैसे वो उन दोनों के बीच एक रेखा खींच रहे हों. तारों के इस पार कोई और दुनिया और तारों के उस पार कोई और दुनिया. फिल्म में बहुत शानदार जस्टापोजीशनिंग है. जैसे- पैरासाइट में हमने देखा था कि बारिश में एक गरीब बस्ती में तहलका मच जाता है और दूसरी ओर एक अमीर बच्चा कैंप लगाकर खुले में एन्जॉय करता है. वैसे ही इस फिल्म में उस दृश्य की कल्पना करिए, जब ब्रूनो अपने घर से केक चुराकर स्मुएल के लिए लाता है. उस वक्त उस यहूदी बच्चे को खाते हुए देखिए, पता चलेगा भूख और किसी चीज को पाने की इच्छा क्या होती है!
इस फिल्म का क्लाइमैक्स शायद किसी फिल्म का सबसे दुखद अंत है. जैसे ‘द पियानिस्’ट का है. अगर आपने The Boy in the Striped Pyjamas नहीं देखी है और ये वीडियो देखने के बाद फिल्म देखने का प्लान कर रहे हैं, तो आगे मत बढ़िए. काहे कि पिछले कुछ मिनटों का सबसे बड़ा स्पॉइलर आने वाला है. मुझे निजी तौर पर ये सिनेमा की सबसे सैड एन्डिंग लगती है. कैसे, आइए बताते हैं.
दुखद अंत
एक सेना का अधिकारी जो यहूदियों को मारता है. उसका देश यहूदियों से नफरत करता है. वो उस तंत्र का हिस्सा है, जो यहूदियों को राक्षस मानता है. उनका नरसंहार करता है और इसमें भरोसा भी करता है. उसका बेटा इस सबसे अनजान है. उसे यहूदियों में भी इंसान दिखते हैं. उसकी एक यहूदी बच्चे से दोस्ती है. जब उसे पता चलता है कि उस यहूदी बच्चे के पिता खो गए हैं, वो उन्हें ढूंढने के लिए तारों के नीचे कैंप में प्रवेश करता है. ये वो दिन है, जब यहूदियों को गैस चेम्बर में ठूंसकर मारा जाना है. चूंकि ब्रूनो भेष बदलकर उस कैंप में घुसता है, उसे भी गैस चेम्बर में ठूंस दिया जाता है. कमाल ये है कि इस दौरान ब्रूनो यहूदी बच्चे का हाथ थामे रहता है. गैस चेम्बर दरवाजे बंद होते हैं. ब्रूनो की मां और बहन उसे खोजते हुए खुद पहली बार उस कैंप को एक्सप्लोर करते हैं. पिता भी साथ हैं. तीनों नाजी रो रहे हैं, बच्चा गैस चैंबर में हाथ थामे एक यहूदी के साथ खड़ा है. इसके बाद क्या होता है, आप खुद समझ सकते हैं.
फिल्म की आलोचना
खैर, इस एन्डिंग की बहुत आलोचना भी हुई. कई हिस्टोरीयन्स ने कहा कि इसमें फैक्ट्स के साथ छेड़छाड़ की गई है. सबके अपने-अपने तर्क थे. साथ ही ये भी कहा गया कि एंड में यहूदियों पर अत्याचार करने वालों को रोते दिखाया गया है. ये अपराधियों के प्रति सिम्पथी पैदा करता है. ये भी सवाल उठाए गए कि ब्रूनो की मां को कैसे नहीं पता था कि यहूदियों को कत्ल किया जा रहा है. जबकि ये उस वक्त जर्मनी में जगजाहिर था. बहरहाल आप कैसे भी सवाल उठाएं. फिल्म की एन्डिंग रोंगटे खड़ी करने वाली है.
एक दिलचस्प तथ्य के साथ अपनी बात खत्म करते हैं. ब्रूनो के रोल में जो बच्चा है, उसे बड़े होने पर आपने नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘सेक्स एजुकेशन’ में देखा है.
चलते हैं अभी. बाकी आप बताएं, आपके हिसाब से इस दुनिया की सबसे दुखद अंत वाली फिल्म कौन-सी है?
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