उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी.Image Credit source: ANI
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नए साल के मौके पर राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की घोषणा की है. बुधवार को धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि यह कानून राज्य के नागरिकों को समान अधिकार देगा और देवभूमि के मूल रूप को बनाए रखने में भी सहायक होगा. यह कदम राज्य के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है.
मुख्यमंत्री धामी ने अपने पोस्ट में ये भी कहा, ‘हम समान नागरिक संहिता लागू करने जा रहे हैं, जो राज्य के नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करेगा. यह कानून न केवल समानता को बढ़ावा देगा, बल्कि देवभूमि के मूल रूप को बनाए रखने में भी मददगार साबित होगा.’
देवभूमि उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता के आशीर्वाद से हम प्रदेश में नागरिकों को समान अधिकार देने के लिए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू करने जा रहे हैं, यह क़ानून न केवल समानता को बढ़ावा देगा बल्कि देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगा। pic.twitter.com/x9Hj8zBaR2
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) January 1, 2025
समान नागरिक संहिता का कानून
उत्तराखंड सरकार ने इस साल समान नागरिक संहिता के लिए कानून पास किया है. यह कानून राज्य के समाज में एकता और समानता को बढ़ावा देगा. विशेष रूप से हुलद्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुए साम्प्रदायिक हिंसा के बाद, उत्तराखंड ने सार्वजनिक और निजी संपत्ति की क्षति वसूली के लिए एक नया कानून भी लागू किया था. यह घटना 8 फरवरी को हुई थी, जब राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पास हुआ था.
भारत का पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गठित एक विशेषज्ञ समिति, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही थीं, उन्होंने फरवरी में UCC का विस्तृत मसौदा राज्य सरकार को सौंपा था. इसके बाद कुछ ही दिनों में उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा में UCC विधेयक प्रस्तुत किया, जिसे 7 फरवरी को पास किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 मार्च को UCC कानून को मंजूरी दी, जिससे उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया जिसने इस कानून को लागू किया.
कई और राज्य भी जता चुके है इच्छा
उत्तराखंड सरकार ने UCC के कार्यान्वयन के लिए पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति बनाई थी. इस समिति ने लागू करने के लिए आवश्यक नियमों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. कई भाजपा शासित राज्यों, जैसे असम, ने भी उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता को अपना आदर्श मानते हुए इसे लागू करने की इच्छा जताई है. मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने की संभावना जनवरी के पूरी तक हो सकती है.
– India Samachar
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