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डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत का सिलसिला जारी, डॉक्टरों के रसूख के आगे लाचार हुई वर्दी महीने बाद दर्ज ना कर सकी एफ आई आर

डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत का सिलसिला जारी

आगरा :- धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर की लापरवाही से कुछ दिन पूर्व ही गलत इंजेक्शन लगाने से युवक की जान चली गई थी जिसको लेकर परिजनों ने अमित जग्गी नर्सिंग होम में हंगामा काटा था जिसकी जांच आज भी कछुआ चाल की तरह रेंग रही है पुलिस ने मृतक का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम करा दिया लेकिन आज तक डॉक्टर के रसूल के आगे एफ आई आर तक लिखना मुनासिब ना समझा हां यह जरूर है कि योगी पुलिस और डॉक्टर मृतक के परिजनों पर दबाव डाल कर मामला रफा-दफा करने का मामला अभी थमा नहीं एक दूसरी जगह डॉक्टर की लापरवाही से डिलीवरी के दौरान महिला की जान चली गई निजी अस्पताल हो या सरकारी अस्पताल मरीजों के साथ जाने से खिलवाड़ किया जाता है और लापरवाही के चलते हर महीने किसी न किसी की मौत होना लाजिमी है लेकिन इसके बावजूद भी जिम्मेदारअधिकारी डॉक्टरों के रसूल के आगे सूरदास बने बैठे रहते हैं और उनका एक ही जवाब होता है कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

डॉक्टरों के रसूल के आगे लाचार होती है वर्दी एक महीना बाद भी दर्ज ना कर सकी डॉक्टर के खिलाफ एफ आई आर अमित जग्गी नर्सिंग होम के बाद मामला थाना बरन के आंवलखेड़ा स्थित माता भगवती देवी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जमालनगर भैंस निवासी 25 बर्षीय रेखा निषाद पत्नी चन्द्रपाल को डिलीवरी के लिए आवलखेड़ा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। साधारण डिलीवरी होने पर जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ थे। लेकिन आधी रात होने के बाद अस्पताल से डॉक्टर और कर्मचारी सब चले गए।

उसी के बाद महिला की तबीयत खराब हो गई और कुछ देर बाद पता चला कि रेखा की मौत हो चुकी है। अस्पताल के कर्मचारियों ने परिवारी जनों को रेखा की मौत की खबर दी तो परिवार में कोहराम मच गया। आनन-फानन में अस्पताल के कर्मचारियों ने मृतक रेखा को परिवार के सदस्यों को सौंप दिया और कह दिया कि इसे जल्दी से जल्दी घर ले जाओ। मृतका के पति ने बताया कि डिलेवरी साधारण होने पर जच्चा व बच्चा दौने स्वस्थ थे। कुछ देर बाद मुझे वाहर निकाल दिया गया। एक घंटा वीत जाने के बाद नर्स ने मुझसे कहा कि आपकी प्रसूता की तबियत ज्यादा खराब हो गई है। जब में प्रसूता के डिलेवरी रूम में गया तो उसका पूरा शरीर पीला पड़ चुका था। उसकी मृत्यु हो चुकी थी।

प्रसूता की मौत की सूचना मिलते ही घर में मच गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों व नर्स की लापरवाही के कारण मौत हुई है।
परिजनों के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसूता की हालत काफी बिगड़ने लगी थी इसलिए परिजनों को वाहर निकाल दिया था।  प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि मुझे स्टाफ ने थोड़ी जानकारी दी है क्योंकि ये रात की घटना है। और जानकारी कर रहा हूं लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं इससे पहले भी कई महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी है लेकिन अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।

किसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं करते और पल्ला झाड़ कर खड़े हो जाते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो  आवलखेड़ा अस्पताल मौत के अस्पताल के नाम से जाना जाएगा यहां क्षेत्र की जनता आने से भी परहेज करने लगेगी।