Home Agra आगरा जनपद स्तरीय शाकाहार निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता

आगरा जनपद स्तरीय शाकाहार निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता

आगरा जनपद स्तरीय शाकाहार निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता

आगरा भारत-भू पर सुधारस की वर्षा करने वाले अनेक महापुरुष और संत कवि जन्म ले चुके हैं। उनकी साधना और कथनी-करनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया है। इन स्थितप्रज्ञ पुरुषों ने अपनी जीवनानुभव की वाणी से त्रस्त और विघटित समाज को एक नवीन संबल प्रदान किया है। जिसने राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और संस्कृतिक क्षेत्रों में क्रांतिक परिवर्तन किये हैं। भगवान राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, ईसा, हजरत मुहम्मदौर आध्यत्मिक साधना के शिखर पुरुष आचार्य कुन्दकुन्द, पूज्यपाद्, मुनि योगिन्दु, शंकराचार्य, संत कबीर, दादू, नानक, बनारसीदास, द्यानतराय तथा महात्मा गाँधी जैसे महामना साधकों की अपनी आत्म-साधना के बल पर स्वतंत्रता और समता के जीवन-मूल्य प्रस्तुत करके सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में बाँधा है।

उनके त्याग और संयम में, सिद्धांतों और वाणियों से आज भी सुख शांति की सुगन्ध सुवासित हो रही है। जीवन में आस्था और विश्वास, चरित्र और निर्मल ज्ञान तथा अहिंसा एवं निर्बैर की भावना को बल देने वाले इन महापुरुषों, साधकों, संत कवियों के क्रम में वर्षायोगरत प्रसिद्ध दिगंबर जैन आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज जी वर्तमान में शिखर पुरुष हैं, जिनकी ओज और माधुर्यपूर्ण वाणी में ऋजुता, व्यक्तित्व में समता, जीने में संयम की त्रिवेणी है। जीवन-मूल्यों को प्रतिस्ठित करने वाले बाल ब्रह्मचारी श्री ज्ञान सागर महाराज जी स्वभाव से सरल और सब जीवों के प्रति मित्रवत व्यवहार के संपोषक हैं, इसी के कारण उनके व्यक्तित्व में विश्व-बन्धुत्व की, मानवता की सौंधी-सुगन्ध विद्यमान है।

संस्कृतियों में भारतीय संस्कृति अपने विशुद्ध शाकाहारी आहार एवं खान पान सरिया के लिए हमेशा से चर्चित एवं विख्यात रही है आहार एवं खानपान मानव जीवन की शारीरिक क्षमता एवं नियमित कार्य कला को अनिवार्य पूजा दायिनी स्रोत तो है ही साथ ही भोजन शक्ति मानवीय जीवन के सारिक विकास के साथ-साथ मानसिक बौद्धिक चारित्रिक एवं आत्मिक उत्थान में भी श्रेष्ठतम भूमिका का निर्वाह करती है विश्व परिदृश्य में मोटे तौर पर आहार को दो तरह शाकाहार एवं मांसाहार में विभेद किया जाता है अर्थात मानवीय शरीर के ऊर्जा हेतु भर्ती द्वारा प्रसारित पदार्थों का सेवन है और इसमें हमारे शरीर में पंच तत्वों के असीम सरकार संवहन होता है भारत ही नहीं बल्कि विश्व के बड़े बड़े ऋषि मुनियों मनीषियों विचारकों बुद्धिजीवियों को शिक्षाविदों वैज्ञानिकों आदि ने सदैव ही शाकाहार को सर्वोत्तम एवं समुचित आहार बताते हुए इसे मानव के समग्र विकास के लिए सिस्टम कहां है और स्वर्ण भी इसी आहार का उपयोग करें यह स्वयं सिद्ध किया है

इसमें जैन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो अपने कलेवर में शाकाहार एवं अहिंसा को सिद्धांत करते हुए सदन से ही मानव समाज की सृष्टि के लिए इनका पुनः जोड़ एवं प्रबल समर्थन करता आ रहा है इतना ही नहीं जैन दर्शन में अहिंसक शब्दों का उपयोग भी पूर्णता वर्जित है शाकाहार के प्रचारक सड़कों के उदाहरण परम पूज्य आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उपयुक्त विषय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने विचार रखें शाकाहार शिरोमणि परम पूज्य 108 आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से शाकाहार की उपयोगिता उनके प्रचार प्रसार एवं युवा पीढ़ी को शाकाहार के प्रभावी मूल्यों से परिचित कराने हेतु देश के शासकीय एवं गैर शासकीय प्राथमिक माध्यमिक विद्यालयों महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के मध्य निरंतर निबंध लेखन एवं भाषण प्रतियोगिता के सफल आयोजन की परंपरा चली है और इसी क्रम में आगरा महानगर में पूज्य आचार्य के पावन एवं मंगलमय वर्षा योग के उपलक्ष में उनकी प्रेरक एवं आशीर्वाद से 22 अक्टूबर सोमवार को एमडी जैन इंटर कॉलेज हरी पर्वत पर भारतीय संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु आयोजित जनपद स्तरीय शाकाहार निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन सकल जैन महाराज आगरा के निर्देशक एवं आगरा दिगंबर जैन परिषद के सहयोग से होने जा रहा है इस प्रतियोगिता में आगरा जनपद के सभी विद्यालय के छात्र-छात्राएं सम्मिलित हो सकते हैं और विजेताओं के प्रोत्साहन के लिए आकर्षण पुरस्कार का भी प्रावधान है